Sri Ganganagar News

परमार्थ कब से अपराध हो गया एडीशनल साहब!

श्रीगंगानगर। परमार्थ की महिमा हमारे धार्मिक ग्रंथों ने गाई है। ईश्वर प्राप्ति  के मार्ग में परमार्थ को सर्वाधिक उच्च स्थान दिया गया है, लेकिन श्रीगंगानगर शहर के पुलिस कर्मचारी इन शब्दों का अर्थ नहीं जानते, तभी तो परमार्थ करने के लिए गये जयदीप बिहाणी के खिलाफ पुलिस ने उन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया, जो धाराएं लुटेरों और बदमाशों पर लगायी जाती है। यह श्रीगंगानगर शहर के लिए बहुत ही अफसोसजनक है। 
शहर की सबसे बड़ी शिक्षण संस्थान बिहाणी शिक्षा न्यास के अध्यक्ष, जिनकी दरियादिली के चलते ही सैकड़ों बच्चे अपने अभिभावकों की मजबूरियों के बावजूद उच्च शिक्षा लेने में कामयाब होते हैं। वे एक निजी शिक्षण संस्थान  से संबंधित ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं लेकिन इसके बावजूद वे हर साल लाखों रुपये फीस मजबूर लोगों के लिए छोड़ देते हैं। 
श्रीगंगानगर शहर का बच्चा-बच्चा जिनके परमार्थ के गीत गाता हो, उसके खिलाफ पुलिस ने पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। श्री बिहाणी का कसूर क्या था? उनके पास अपने घर पर पूजा-पाठ करने आने वाली महिला का फोन आता है। महिला उससे मदद मांगती है और बताती है कि उसका जो पैतृक मकान है, उसको लेकर उसके परिवारवालों से झगड़ा हो गया। श्री बिहाणी दोनों पक्षों को वहां समझाने के लिए जाते हैं। दोनों के बीच झगड़ा पहले ही हुआ था। पुलिस वहां पर मौजूद थी। श्री बिहाणी ने दोनों पक्षों से बात की और पुलिस से भी आग्रह किया कि वह इस मामले का पटाक्षेप करे किंतु यह क्या? पुलिस ने तो जयदीप बिहाणी के खिलाफ ही मारपीट, घर में घुसने और चैन छीनने आदि के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया। क्या यह न्याय है। 
पुलिस अधीक्षक हरेन्द्र महावर आवश्यक कार्य से जिले से बाहर हैं और एसपी का कार्यभार एडीशनल एसपी के पास है। इस संबंध में एडीशनल एसपी को शहर के मौजिज ने पूरे घटनाक्रम से अवगत भी करवाया, किंतु इसके बावजूद एफआईआर होना इस बात की ओर इंगित करता है कि कहीं न कहीं पुलिस राजनीतिक दबाव में थी। 
जयदीप बिहाणी की वह व्यक्तिगत प्रोपर्टी नहीं थी। वे वहां तो किसी अबला महिला की मदद करने के लिए गये थे। इस मदद को ही परमार्थ कहते हैं। परमार्थ की महिमा तो वेदों और पुराणों ने भी गायी है। श्रीगंगानगर पुलिस की कार्यप्रणाली को देखकर यह साफ हो गया है कि पुलिस ने परमार्थ शब्द को भी अपने ही स्तर पर आईपीसी में भी अपराध मान लिया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर शहर के व्यापारियों ही नहीं बल्कि आम लोगों में भी रोष है। अगर इसी तरह से पुलिस झगड़ा करने वालों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करती रही तो भविष्य में पुलिस को भी आवश्यकता पडऩे पर मदद मिलनी आसान नहीं होगी। 
Satish Beri
Sri Ganganagar
9772688172

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